भारत में सांप्रदायिकता का उदय: एक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.8224/journaloi.v73i1.1081Abstract
भारत में सांप्रदायिकता का उदय एक जटिल और गहन प्रक्रिया है, जो विशेष रूप से उपनिवेशी शासन और विभाजन के बाद बढ़ी। ब्रिटिश शासन के दौरान "डिवाइड एंड रूल" नीति ने धार्मिक पहचान को और मजबूत किया, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय समाज में विभाजन और असहमति बढ़ी। विभाजन (1947) के समय और उसके बाद, सांप्रदायिक दंगे और संघर्षों ने सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित किया। भारतीय समाज में सांप्रदायिकता का प्रभाव केवल धार्मिक या सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजनीति, अर्थव्यवस्था और मीडिया के माध्यम से भी फैलता है। इस अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि सांप्रदायिकता कैसे भारतीय समाज में उभरी और इसके परिणामस्वरूप किस प्रकार के सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों ने जन्म लिया। इसके साथ ही, सांप्रदायिकता से निपटने के उपायों और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के प्रयासों पर भी विचार किये जाने की आवश्यकता है।



